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बालों और त्वचा की खूबसूरती के लिए करें सर्वांगासन

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सर्वांगासन योग के लाभ एवं विधि सर्वांगासन क्या है ? सर्वांगासन योग पूरे शरीर यानि पैर की उंगलियों से लेकर मस्तिष्क तक फायदा पहुंचता है। साथ ही साथ यह कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है। सर्वांगासन को योग की दुनिया में आसनों के माँ के नाम से पुकारा जाता है क्योंकि यह आसन शरीर के हर अंग को किसी न किसी तरह से स्वास्थ लाभ पहुंचाता है। माँ को देख कर मुस्कान छिपाए नहीं छुपती उसी तरह सर्वांगासन का प्रतिदिन अभ्यास करने से पूरा शरीर हर्ष व् उल्लास से भरा रहता है और साधक विभिन्न प्रकार की विकारों से भी बचता है। सर्वांगासन की विधि अब बात आती है कि सर्वांगासन को कैसे किया जाए जिससे इसका ज़्यादा से ज़्यादा फायदा मिल सके। •सबसे पहले अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाएं। धीरे – धीरे अपने पैरों को 90 डिग्री पर ऊपर उठाएं। •धीरे से सिर को अपने पैरों की तरफ लाने का प्रयास करें। •आपकी ठोड़ी सीने से सटा कर रखें। •30 सेकंड या उससे अधिक के लिए मुद्रा को बनाए रखने के लिए प्रयास करें, और फिर धीरे-धीरे पुरानी स्थिति में वापस आ जाएँ, यह एक चक्र हुआ। •इस तरह से आप 5 चक्र करें। स...

भस्त्रिका प्राणायाम विधि, लाभ और सावधानियां

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भस्त्रिका प्राणायाम क्या है ? भस्त्रिका प्राणायाम भस्त्र शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है ‘धौंकनी’। वास्तविक तौर पर यह प्राणायाम एक भस्त्र या धौंकनी की तरह कार्य करता है। धौंकनी के जोड़े की तरह ही यह ताप को हवा देता है, भौतिक औऱ सूक्ष्म शरीर को गर्म करता है। जहाँ तक बात रही भस्त्रिका प्राणायाम की परिभाषा की तो यह एक ऐसी प्राणायाम है जिसमें लगातार तेजी से बलपूर्वक श्वास लिया और छोड़ा जाता है। जैसे लोहार धौंकनी को लगातार तेजी से चलाता है, उसी तरह लगातार तेजी से बलपूर्वक श्वास ली और छोड़ी जाती है।  योग ग्रन्थ हठप्रदीपिका में इस प्राणायाम को विस्तार से समझाया गया है। भस्त्रैव लौहकाराणां यथा क्रमेण सम्भ्रमेत्। तथा वायुं च नासाभ्यामुभाभ्यां चालयेच्छनैः।। – घें. सं. 5/75 इस श्लोक का मतलब होता है जिस तरह लोहार की धौंकनी लगातार फुलती और पिचकती रहती है, उसी तरह दोनों नासिकाओं से धीरे-धीरे वायु अंदर लीजिए और पेट को फैलाइए, उसके बाद गर्जना के साथ इसे तेजी से बाहर फेंकिए। भस्त्रिका प्राणायाम की विधि: अब बात आती है कि भस्त्रिका प्राणायाम कैसे किया जाए। यहां पर इसको सरल ...